विजय मांजरेकर: वह महान भारतीय खिलाड़ी जिसने गुस्से में खिलाड़ी को चांटा मारा और नौकरी गंवा बैठा
इंग्लैंड के लिए अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर की शुरुआत करने वाले महान भारतीय क्रिकेटर विजय मांजरेकर का आज जन्मदिन है। 26 सितंबर 1931 को मुंबई में पैदा हुए इस खिलाड़ी ने तकरीबन 13 साल तक टेस्ट मैच खेला। उनके बेटे संजय मांजरेकर ने भी भारतीय टीम में जगह बनाई, हालांकि बतौर बल्लेबाज उतने सफल नहीं हो पाए, लेकिन कई दशकों से कमेंट्री में सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं। हाल ही में संजय ने आत्मकथा लिखी, नाम है इम्परफेक्ट। इस ऑटोबायोग्राफी ने संजय ने कई मजेदार किस्से साझा किए, लेकिन अपने पिता विजय मांजरेकर और परिवार से उनके रिश्तों के बारे में पढ़कर कोई भी चौंक जाएगा। संजय को इस हिम्मत के लिए शाबासी भी देनी चाहिए। पूर्व टेस्ट क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने बताया कि किस तरह उन्हें अपने पिता और पूर्व क्रिकेटर विजय की मौजूदगी में डर का अहसास होता था। बकौल संजय वह अपने पिता से बहुत डरते थे। दरअसल पूरा परिवार (संजय, दो बहनें और मां) ही विजय मांजरेकर से खौफ खाता था। जब विजय ने क्रिकेट से संन्यास लिया, तब खिलाड़ियों को इतना पैसा नहीं मिलता था। मजबूरी में नौकरी करनी पड़ी, लेकिन मैदान पर तेज गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले खिलाड़ी को डेस्क पर बैठकर बाबूगिरी नहीं सुहाई। इन सबके चलते विजय लगातार चिड़चिड़े और गुस्सैल होते गए। घर में कई बार हाथापाई की नौबत भी आई।
विजय को एक बार अंडर-19 टीम का कोच और मैनेजर बनाकर इंग्लैंड भेजा गया। उस दौरान एक मशहूर खिलाड़ी को उन्होंने तमाचा रसीद लगा दिया। मीडिया ने सीनियर मांजरेकर को आड़े हाथों लेते हुए, जमकर आलोचना की। मजबूरन बीसीसीआई को उन्हें इस पद से हटाना पड़ा। मतलब गुस्से से उनकी एक अच्छी खासी नौकरी से हाथ धोना पड़ा।

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